धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी खास होती है मकर संक्रांति, जानिए इसका महत्व

makar
नए साल 2020 के साथ नए महीने की शुरुआत भी हो चुकी है. नए साल का पहला महीना यानि की जनवरी कई सारी खुशियां, त्योहार और जयंतियां लेकर आता है. इस बार 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई जाएगी, 13 जनवरी को मस्ती, खुशी का त्योहार लोहड़ी और 14 जनवरी को मकर संक्रांति. मकर संक्रांति को हिंदुओं का सबसे खास त्योहार माना जाता है. मकर संक्रांति का जितना धार्मिक महत्व है उतना ही वैज्ञानिक महत्व है.

ऐसा कहा जाता है कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति का योग बनता है. लेकिन इसके अलावा भी कई सारे बदलाव आते हैं. मकर संक्रांति का संबंध केवल धर्म से ही नहीं बल्कि अन्य चीजों से भी जुड़ा है, जिसमें वैज्ञानिक चीजें भी शामिल है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति से जुड़े वैज्ञानिक कारण...

- मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है. इससे तमाम तरह के रोग दूर हो सकते हैं. इसलिए इस दिन नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है.

- मकर संक्रांति के समय उत्तर भारत में ठंड का मौसम रहता है. इस मौसम में तिल-गुड़ का सेवन सेहत के लिए लाभदायक रहता है यह चिकित्सा विज्ञान भी कहता है. इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है. यह ऊर्जा सर्दी में शरीर की रक्षा रहती है.

- पुराण और विज्ञान दोनों में सूर्य की उत्तरायन स्थिति का अधिक महत्व है. सूर्य के उत्तरायन होने पर दिन बड़ा होता है इससे मनुष्य की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है. मानव प्रगति की ओर अग्रसर होता है. प्रकाश में वृद्धि के कारण मनुष्य की शक्ति में वृद्धि होती है.

- इस दिन से रात छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं. दिन बड़ा होने से सूर्य की रोशनी अधिक होगी और रात छोटी होने से अंधकार कम होगा. इसलिए मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है.

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