रायपुर : छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की देश में की सर्वाधिक लघु वनोपजों की खरीदी

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और पहल से छत्तीसगढ़ देश में सर्वाधिक मूल्य की लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी करने वाला राज्य बना हुआ है। “द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया” (ट्राईफेड) द्वारा जारी किए गए आंकड़ांे के अनुसार छत्तीसगढ़ में अब तक 28 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य की लघु वनोपजों की वनवासियों और ग्रामीणों से खरीदी की गई है, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक है। ट्राईफेड के आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में अब तक 30 करोड़ 63 लाख 61 हजार रूपए मूल्य की लघु वनोपजों की खरीदी की गई है, इसमें से अकेले छत्तीसगढ़ में 28 करोड़ रूपए मूल्य की लघु वनोपजों की खरीदी की गई है। इसमें देश के अन्य सभी राज्यों द्वारा अब तक मात्र एक करोड़ 93 लाख रूपए की राशि के लघु वनोपजों की खरीदी हुई है। छत्तीसगढ़ में अब 25 लघु वनोपजों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा रही है।

    प्रदेश में लघु वनोपजों का यह आंकड़ा लगतार बढ़ रहा है। राज्य सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार चालू सीजन के दौरान छत्तीसगढ़ में अब तक एक लाख 66 हजार संग्रहकों से लगभग 28 करोड़ रूपए मूल्य की 9 हजार 563 मीट्रिक टन लघु वनोपजों का संग्रहण किया जा चुका है। कोरोना लॉकडाउन के कारण संकट की इस घड़ी में सरकार द्वारा लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और नगद भुगतान की प्रक्रिया से वनांचल के वनवासी-ग्रामीणों को काफी राहत मिल रही है। साथ ही वनोपजों के संग्राहकों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ गए हैं। वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2015 से वर्ष 2018 तक मात्र सात वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही थी। वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा वनवासी ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए खरीदी जाने वाली लघु वनोपजों की संख्या बढ़ाकर अब 25 कर दी गयी है।

    राज्य में चालू वर्ष में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत संग्रहित लघु वनोपजों में इमली (बीज सहित), पुवाड़ (चरोटा), महुआ फूल (सूखा), बहेड़ा, हर्रा, कालमेघ, धवई फूल (सूखा), नागरमोथा, इमली फूल, करंज बीज तथा शहद शामिल हैं। इसके अलावा बेल गुदा, आंवला (बीज रहित), रंगीनी लाख, कुसुमी लाख, फुल झाडु, चिरौंजी गुठली, कुल्लू गोंद, महुआ बीज, कौंच बीज, जामुन बीज (सूखा), बायबडिंग, साल बीज, गिलोय तथा भेलवा लघु वनोपजें भी इसमें शामिल हैं।

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