3 तरह के लोगों को कोरोना का खतरा सबसे ज्यादा, इस ब्लड ग्रुप वालों को सावधान रहने की जरूरत

कोरोना वायरस का असर तीन तरह के लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मोटापा ग्रस्त लोग, रक्त समूह ‘ए’ वाले मरीज व शरीर में विशेष प्रोटीन की मौजूदगी वाले मरीजों में संक्रमण का खतरा सर्वाधिक होता है। साथ ही अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों ने पाया है कि वे मरीज जो पहले किसी दूसरी तरह का संक्रमण झेल चुके हैं, उनके लिए कोविड-19 बड़ा खतरा बनकर आता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डायरेक्टर फ्रांसिस कोलिन्स का कहना है कि गंभीर संक्रमण वाले कोरोना मरीज में 22 तरह के प्रोटीन लगातार पाए जाते हैं। जो कि मरीज में गंभीर संक्रमण का संकेत हैं। वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल विकसित किया जो संक्रमित मरीजों के रक्त में इन प्रोटीनों की पहचान कर सकता है।

रक्त समूह बताता है गंभीरता : ए ब्लड ग्रुप वाले कोविड मरीजों को उपचार के दौरान वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ने का खतरा 50 प्रतिशत होता है। जबकि ओ ब्लड ग्रुप वाले मरीज ऑक्सीजन की कमी के मामले में आंशिक रूप से सुरक्षित हैं। विशेषज्ञ कोलिन्स का कहना है कि वायरस के लिए हर व्यक्ति के स्वरूप में परिवर्तन के लिए हर इंसानी शरीर एक खास मेजबान की भूमिका निभाता है, जिस कारण किसी व्यक्ति में वायरस का असर बहुत ज्यादा होता है और किसी में बहुत कम।

मोटापाग्रस्त मरीज में मौत का खतरा : न्यूयॉर्क शहर स्थित लैंगवन हॉस्पिटल की विशेषज्ञ जेनिफर लाइटर ने पता लगाया है कि कोरोना वायरस के गंभीर असर में मोटापा एक प्रमुख कारक है। 30 से 34 बॉडी मास इंडेक्स वाले कोविड मरीज के आईसीयू में भर्ती होने का खतरा 30 से कम बीएमआई वाले संक्रमित मरीजों से दोगुना होता है। 30 से अधिक बीएमआई वाले मरीजों की मौत की संभावना तीन गुनी होती है।


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